गुरुग्राम की पहचान सिर्फ साइबर सिटी के तौर पर नहीं, बल्कि हरियाणा के सबसे बड़े शिक्षा केंद्रों में भी होती है। शहर में बड़े निजी स्कूल, आधुनिक कैंपस और पढ़ाई की बेहतरीन सुविधाएं मौजूद हैं। लेकिन इस बार हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड (HBSE) की 10वीं परीक्षा के नतीजों ने सबको चौंका दिया। शिक्षा के मामले में आगे रहने वाला गुरुग्राम इस बार प्रदेश के टॉप जिलों की दौड़ में पीछे रह गया और 18वें स्थान पर पहुंच गया।

सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि शिक्षा के क्षेत्र में मजबूत माने जाने वाला गुरुग्राम इस बार राज्य के टॉप-10 जिलों की सूची में भी जगह नहीं बना सका। नतीजे सामने आने के बाद स्कूल प्रबंधन, शिक्षा विभाग और अभिभावकों के बीच चर्चा तेज हो गई है कि आखिर इतनी सुविधाओं के बावजूद जिले का प्रदर्शन कमजोर क्यों रहा।
पिछले साल से भी खराब रहा प्रदर्शन
बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार जिले से कुल 15,266 विद्यार्थियों ने 10वीं की परीक्षा दी थी। इनमें से 13,654 छात्र सफल रहे।
इस वर्ष गुरुग्राम का कुल परीक्षा परिणाम 89.44 प्रतिशत दर्ज किया गया। जबकि पिछले साल जिले का रिजल्ट 92.89 प्रतिशत था और गुरुग्राम प्रदेश में 14वें स्थान पर रहा था। इस बार रिजल्ट के साथ-साथ रैंकिंग में भी गिरावट दर्ज की गई।
आखिर कहां रह गई कमी?
विशेषज्ञों का मानना है कि संसाधनों और हाईटेक सुविधाओं के बावजूद छात्रों की बोर्ड तैयारी को और मजबूत करने की जरूरत है। शिक्षकों ने डिजिटल डिस्ट्रैक्शन, पढ़ाई के प्रति घटती गंभीरता और परीक्षा के दबाव को भी इसके पीछे की वजह बताया है।
शिक्षा विभाग करेगा समीक्षा
कमजोर प्रदर्शन वाले स्कूल अब शिक्षा विभाग की नजर में हैं। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे स्कूलों की अलग समीक्षा की जाएगी और आने वाले सत्र के लिए सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
