गुरुग्राम नगर निगम गुरुग्राम (MCG) में करीब 17 महीनों से खाली पड़े Senior Deputy Mayor और Deputy Mayor के पदों के लिए आज चुनाव हो रहा है। दोनों पदों को लेकर नगर निगम से लेकर भाजपा संगठन तक हलचल तेज है। चुनाव से पहले भाजपा ने अपने पार्षदों की बैठक बुलाई है। पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि मतदान से पहले ही दोनों पदों के लिए उम्मीदवारों के नाम पर सहमति बना ली जाए, ताकि चुनाव के दौरान पार्टी के अंदर गुटबाजी सामने न आए।

36 पार्षदों वाले सदन में BJP के साथ 34 का समर्थन
गुरुग्राम नगर निगम में कुल 36 पार्षद हैं। इनमें 24 पार्षद भाजपा के हैं, जबकि 10 निर्दलीय पार्षदों ने भाजपा को समर्थन दिया हुआ है। इसके अलावा सदन में एक पार्षद कांग्रेस और एक पार्षद JJP से है। इस तरह मौजूदा राजनीतिक गणित में भाजपा के साथ 24 भाजपा पार्षदों के अलावा 10 निर्दलीय पार्षद यानी कुल 34 पार्षदों का समर्थन बताया जा रहा है। ऐसे में दोनों पदों के चुनाव में संख्या बल के लिहाज से भाजपा की स्थिति मजबूत दिखाई दे रही है। हालांकि, उम्मीदवारों के चयन को लेकर पार्टी के अंदर चल रही खींचतान चुनाव को दिलचस्प बना रही है।
जातीय समीकरण भी अहम
दोनों पदों के लिए उम्मीदवारों के चयन में जातीय समीकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 36 पार्षदों में 9 यादव समाज, 4 SC, 7 जाट, 5 गुर्जर, 4 OBC, 2 ठाकुर, 2 ब्राह्मण, 1 वैश्य, 1 पंजाबी और 1 सैन समाज से हैं। ऐसे में भाजपा के सामने दोनों पदों के लिए नाम तय करते समय राजनीतिक समीकरण के साथ-साथ सामाजिक समीकरण साधने की चुनौती भी है। एक पद यादव समाज और दूसरा पद SC समाज के पार्षद को दिया जा सकता है। हालांकि, इन नामों को लेकर अंतिम फैसला भाजपा नेतृत्व की बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा।

राव इंद्रजीत और राव नरबीर खेमों के बीच खींचतान की चर्चा
MCG के दोनों महत्वपूर्ण पदों को लेकर भाजपा के अंदर गुटीय राजनीति की चर्चा भी तेज है। केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह और हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह के खेमों की ओर से अपने-अपने पसंदीदा पार्षदों को पद दिलाने की कोशिश की चर्चा है। ऐसे में आज का चुनाव केवल दो पदों को भरने तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इसके नतीजे से गुरुग्राम की स्थानीय राजनीति में किस गुट का प्रभाव अधिक है, इसकी तस्वीर भी सामने आ सकती है।
सहमति नहीं बनी तो बैलेट पेपर से मतदान
भाजपा नेतृत्व की कोशिश है कि पार्टी के अंदर ही दोनों पदों के उम्मीदवारों के नाम पर सहमति बन जाए। अगर ऐसा नहीं होता है तो पार्टी व्हिप जारी होने के बावजूद बैलेट पेपर के जरिए मतदान की स्थिति बन सकती है। Senior Deputy Mayor और Deputy Mayor के चुनाव को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में 15 सितंबर को सुनवाई भी होनी है। इससे एक दिन पहले यानी 14 सितंबर को सुबह 11 बजे HIPA में बैठक बुलाई गई है। करीब 17 महीने से खाली पड़े दोनों पदों के चुनाव के लिहाज से यह तारीख प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
17 महीने बाद खाली पदों पर होगा फैसला
MCG में Senior Deputy Mayor और Deputy Mayor के पद करीब 17 महीनों से खाली हैं। लंबे समय से दोनों पदों पर नियुक्ति नहीं होने के कारण यह चुनाव स्थानीय राजनीति के साथ-साथ नगर निगम के कामकाज के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि भाजपा किन पार्षदों को इन दोनों महत्वपूर्ण पदों के लिए मैदान में उतारती है और मतदान के बाद Senior Deputy Mayor और Deputy Mayor की कुर्सी किसके नाम होती है।
