राहुल गांधी गुरुग्राम में कांग्रेस की राजनीति को नई चर्चा देने वाले हैं। पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह की ‘सद्भाव यात्रा’ के अंतिम चरण में राहुल गांधी की एंट्री ने हरियाणा कांग्रेस के अंदर हलचल बढ़ा दी है। राजनीतिक गलियारों में इसे सिर्फ एक पदयात्रा नहीं, बल्कि बड़े सियासी संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

खांडसा चौक से करेंगे पदयात्रा
तय कार्यक्रम के मुताबिक राहुल गांधी दिल्ली से गुरुग्राम पहुंचेंगे। यहां वे ऐतिहासिक खांडसा चौक से बृजेंद्र सिंह के साथ पदयात्रा शुरू करेंगे। करीब एक किलोमीटर लंबी यह यात्रा शहर के बीचोंबीच निकाली जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों के जुटने की संभावना है।

पदयात्रा के बाद राहुल गांधी एसडी स्कूल के पास आयोजित जनसभा को संबोधित करेंगे। माना जा रहा है कि अपने संबोधन में वे हरियाणा की राजनीति, सामाजिक सद्भाव और संगठन को लेकर बड़ा संदेश दे सकते हैं।
कांग्रेस में बढ़ी हलचल
राहुल गांधी के दौरे से पहले गुरुग्राम कांग्रेस पूरी तरह एक्टिव मोड में नजर आ रही है। कमान सराय स्थित कांग्रेस भवन में आज प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र और प्रदेश प्रभारी बीके हरिप्रसाद पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे।
बैठक में कार्यक्रम की जिम्मेदारियां तय की जाएंगी और भीड़ प्रबंधन से लेकर सुरक्षा तक की रणनीति पर चर्चा होगी। वहीं बृजेंद्र सिंह भी कार्यकर्ताओं के साथ अलग बैठक कर यात्रा की तैयारियों का जायजा लेंगे।
सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
राहुल गांधी के दौरे को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां भी अलर्ट मोड पर हैं। उनकी सुरक्षा टीम गुरुग्राम पहुंचकर पूरे रूट का निरीक्षण करेगी। खांडसा चौक से लेकर जनसभा स्थल तक सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जा रही है।
क्यों खास मानी जा रही है यह यात्रा?
बृजेंद्र सिंह ने ‘सद्भाव यात्रा’ की शुरुआत अक्टूबर 2025 में की थी। अब तक वे हरियाणा की 90 में से 83 विधानसभा क्षेत्रों में पहुंच चुके हैं। हालांकि इस दौरान कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने यात्रा से दूरी बनाए रखी।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके गुट ने इस यात्रा को बृजेंद्र सिंह का निजी कार्यक्रम बताते हुए खुलकर समर्थन नहीं दिया था। ऐसे में यात्रा के अंतिम चरण में राहुल गांधी का शामिल होना कई राजनीतिक मायनों में अहम माना जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राहुल गांधी की मौजूदगी बृजेंद्र सिंह को हरियाणा कांग्रेस में नई मजबूती दे सकती है। साथ ही इसे पार्टी आलाकमान की ओर से उन नेताओं के समर्थन के रूप में भी देखा जा रहा है, जो संगठन स्तर पर सक्रिय हैं।
