गुरुग्राम मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर एक ऐसी जानकारी सामने आई है, जो इसकी रफ्तार पर असर डाल सकती है। प्रोजेक्ट में मेट्रो की डिजाइन स्पीड 80 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है, लेकिन प्रस्तावित रूट पर मौजूद 77 मोड़ ट्रेन की स्पीड को कई जगह कम करने पर मजबूर कर सकते हैं।

28.5 किमी के रूट पर 77 मोड़
हुडा सिटी सेंटर से साइबर सिटी के बीच करीब 28.5 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का प्रस्ताव है। डीपीआर के मुताबिक पूरे रूट पर 77 हॉरिजॉन्टल कर्व यानी मोड़ होंगे। इनमें करीब 42 प्रतिशत मोड़ों की रेडियस 200 मीटर या उससे कम है। इनमें सबसे तीखा मोड़ 125 मीटर रेडियस का बताया गया है। ऐसे मोड़ों पर मेट्रो को सुरक्षित तरीके से चलाने के लिए स्पीड कम करनी पड़ेगी।
80 किमी की डिजाइन स्पीड, लेकिन हर जगह नहीं
मेट्रो की डिजाइन स्पीड 80 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ट्रेन पूरे रूट पर इसी रफ्तार से चलेगी। विशेषज्ञों के मुताबिक जितना तीखा मोड़ होगा, उतनी ही कम स्पीड रखनी पड़ेगी। यानी यात्रियों को कुछ हिस्सों में मेट्रो की रफ्तार कम महसूस हो सकती है।
सड़क की चौड़ाई भी बनेगी वजह
प्रस्तावित मेट्रो लाइन को सड़क के बीच बने मीडियन पर रखा जाना है। जहां सड़क की चौड़ाई कम होगी, वहां मेट्रो लाइन को भी उसी के अनुसार मोड़ना पड़ेगा। यही वजह है कि कई स्थानों पर लंबे सीधे ट्रैक के बजाय कर्व बनाए गए हैं। ऐसे में सवाल यह है कि 28.5 किलोमीटर के इस पूरे रूट पर मेट्रो वास्तव में कितनी तेज दौड़ पाएगी? इसका जवाब ट्रेन की गति सीमा और अलग-अलग मोड़ों पर तय की जाने वाली सुरक्षित स्पीड से मिलेगा।
