गुरुग्राम में नकली दवाओं के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच एक और बड़ा अपडेट सामने आया है। नकली टेल्मा-एएम गोलियों के मामले में औषधि नियंत्रण विभाग ने दो और आरोपितों को गिरफ्तार किया है। अब जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर नकली दवा बनकर कहां से निकली और किन-किन लोगों तक पहुंची।
मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपितों की पहचान विपिन कुमार और प्रदीप कुमार के रूप में हुई है। विभाग के मुताबिक, दोनों पर नकली टेल्मा-एएम गोलियों के निर्माण, सप्लाई और बिक्री से जुड़े होने का आरोप है।

पहले दो लोगों की हो चुकी है गिरफ्तारी
इस मामले में इससे पहले सुव्रत द्विवेदी और जुवैयर को गिरफ्तार किया जा चुका है। अब दो और गिरफ्तारियां होने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। टीम नकली दवा से जुड़े पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है।
एक को जेल, दूसरे से हो रही पूछताछ
विभाग के अनुसार, विपिन कुमार को 21 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। उस पर नकली टेल्मा-एएम गोलियों के निर्माण और सप्लाई से जुड़े होने का आरोप है वहीं प्रदीप कुमार को 25 सितंबर की रात करीब साढ़े नौ बजे गिरफ्तार किया गया। उस पर नकली दवा के निर्माण और बिक्री में शामिल होने का आरोप है।
दोनों को 26 सितंबर को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने विपिन कुमार को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जिसके बाद उसे भोंडसी जेल भेजा गया। वहीं प्रदीप कुमार को **चार दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।
कहां बन रही थी नकली दवा?
प्रदीप से पुलिस और औषधि नियंत्रण विभाग की टीम पूछताछ कर रही है। जांच का मुख्य फोकस नकली दवा के निर्माण, सप्लाई और बिक्री से जुड़े पूरे नेटवर्क का पता लगाना है। विभाग का कहना है कि जांच में जिसकी भी भूमिका सामने आएगी, उसके खिलाफ तथ्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह कार्रवाई नकली दवाओं के खिलाफ औषधि एवं खाद्य प्रशासन विभाग की कार्रवाई का हिस्सा है। मामले में अब तक हुई गिरफ्तारियों के बाद जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि इस नकली दवा के पीछे पूरा नेटवर्क कितना बड़ा है और इसकी सप्लाई कहां-कहां तक पहुंची।
