गुरुग्राम में भूजल पर बड़ा एक्शन! बोरवेल से लेकर तालाबों तक बदलेगा पूरा सिस्टम

शहर में लगातार गिरते भूजल स्तर को बचाने के लिए अब बड़े स्तर पर योजना तैयार की जा रही है। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) ने भूजल पर निर्भरता कम करने और बारिश के पानी को ज्यादा से ज्यादा जमीन में पहुंचाने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। GMDA के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पीसी मीणा की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। तय किया गया कि भूजल का इस्तेमाल करने वाले सभी विभाग अब इसके वैकल्पिक इंतजाम तलाशेंगे और चरणबद्ध तरीके से बोरवेल बंद किए जाएंगे।

कब तक देना होगा एक्शन प्लान?
CEO पीसी मीणा ने सभी संबंधित विभागों को 6 अक्टूबर तक अपना एक्शन प्लान देने के निर्देश दिए हैं। इस प्लान में भूजल का इस्तेमाल कम करने और भूजल रिचार्ज बढ़ाने के उपाय बताए जाएंगे। वहीं, जिला प्रशासन को अनधिकृत बोरवेल के खिलाफ कार्रवाई की योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

शहर में ही रोका जाएगा बारिश का पानी
बैठक में बारिश के पानी को शहर से बाहर बहकर जाने से रोकने पर खास जोर दिया गया। अधिकारियों का लक्ष्य है कि बारिश का ज्यादा से ज्यादा पानी शहर में ही रोका जाए और उसे जमीन के अंदर पहुंचाया जाए।
इसके लिए:
– प्राकृतिक जलाशयों को दोबारा विकसित किया जाएगा।
– जलाशयों से अतिक्रमण हटाया जाएगा।
– ग्रीन बेल्ट का लेवल नीचे किया जाएगा।
– पार्कों को जरूरत के अनुसार बायो-स्वेल के रूप में विकसित किया जाएगा।
– पार्कों के नीचे अंडरग्राउंड वाटर स्टोरेज टैंक बनाने की संभावनाएं देखी जाएंगी।
GMDA, TCS के सहयोग से सेक्टर-38 के ताऊ देवीलाल स्टेडियम के फुटबॉल ग्राउंड के नीचे अंडरग्राउंड टैंक बनाने की फिजिबिलिटी स्टडी भी करा रहा है।

IIT दिल्ली की मदद से बन रहे रेन वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर
GMDA, IIT दिल्ली के सहयोग से शहर में 5 आधुनिक रेन वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर** तैयार कर रहा है।
इनमें से:
– सेक्टर-31 में एक स्ट्रक्चर तैयार हो चुका है।
– सेक्टर-39 में एक स्ट्रक्चर तैयार है।
– सेक्टर-55 के AIT पार्क में भी काम पूरा हो चुका है।
– रेजांगला चौक पर चौथे स्ट्रक्चर का काम जारी है।
अगर इनका परिणाम अच्छा रहा तो शहर के दूसरे हिस्सों में भी इसी तरह के स्ट्रक्चर बनाए जाएंगे।

तालाब और झीलों को पूरे साल पानी से भरने की तैयारी
गुरुग्राम नगर निगम अब IIT गांधीनगर के सहयोग से इंजेक्शन वेल भी विकसित करेगा। इसके अलावा तालाबों, झीलों और जोहड़ों को इस तरह विकसित करने की योजना है कि इनमें सिर्फ बारिश के दौरान ही नहीं, बल्कि पूरे साल पानी बना रहे। हरियाणा वाटर रिसोर्स अथॉरिटी के मुताबिक जिले में 142 तालाबों के पुनरुद्धार की योजना है। इनमें 68 तालाबों का काम पूरा हो चुका है, जबकि 74 पर काम चल रहा है।

इसके अलावा मनरेगा के तहत 21 अन्य तालाबों का भी पुनरुद्धार कराया गया है। गुरुग्राम नगर निगम क्षेत्र में 32 तालाबों को दोबारा विकसित किया जा चुका है और 21 पर काम जारी है।

टर्शरी ट्रीटेड पानी का बढ़ेगा इस्तेमाल
बैठक में सीईओ पीसी मीणा ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से मिलने वाले टर्शरी ट्रीटेड पानी के इस्तेमाल को बढ़ाने पर भी जोर दिया। फिलहाल टेक्सटाइल इंडस्ट्री को GMDA की ओर से 10 MLD शोधित पानी दिया जा रहा है। अब दूसरी औद्योगिक इकाइयों को भी इस पानी का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे उद्योगों की भूजल पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

सोसायटियों के STP की भी होगी जांच
ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में लगे STP तय मानकों के अनुसार चल रहे हैं या नहीं, इसकी निगरानी हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) करेगा। सोसायटियों में STP का बिजली कनेक्शन अलग रखने और जीरो डिस्चार्ज नीति को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

भूजल बचाने पर प्रशासन का फोकस
बैठक में साफ किया गया कि गुरुग्राम में भविष्य के लिए पानी बचाने के लिए भूजल पर निर्भरता कम करना जरूरी है। इसके लिए बोरवेल को धीरे-धीरे कम करने के साथ-साथ बारिश के पानी को बचाने, तालाबों को पुनर्जीवित करने और शोधित पानी के दोबारा इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। बैठक में डीसी उत्तम सिंह, नगर निगम आयुक्त प्रदीप दहिया, HSVP प्रशासक वैशाली सिंह, GMDA अतिरिक्त CEO विश्वजीत चौधरी, मानेसर निगम आयुक्त प्रदीप सिंह समेत केंद्रीय भूजल प्राधिकरण, हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण, सिंचाई विभाग और हाइड्रोलॉजिस्ट मौजूद रहे।

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