गुरुग्राम की हरियाली बढ़ाने और पानी की बर्बादी रोकने के लिए नगर निगम ने बड़ा प्लान तैयार किया है। लेकिन शहर में 140 तालाबों की पहचान होने के बावजूद अभी 60 तालाबों का विकास बाकी है। वहीं, पार्कों की सिंचाई में ताजे पानी की खपत कम करने के लिए भी बड़े स्तर पर तैयारी की जा रही है। ऐसे में सवाल है कि इन योजनाओं से गुरुग्राम की तस्वीर कितनी बदलेगी और इनका कितना फायदा शहरवासियों को मिलेगा?

3 साल में करोड़ों रुपये की मंजूरी
निगमायुक्त प्रदीप दहिया की अध्यक्षता में हुई बैठक में नगर निगम गुरुग्राम (MCG) की बागवानी शाखा ने वित्त वर्ष 2024-25 से 2026-27 तक के कार्यों का ब्यौरा पेश किया। रिपोर्ट के अनुसार, इन तीन वित्तीय वर्षों में बागवानी से जुड़े विभिन्न कार्यों के लिए कुल 247.13 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृतियां दी गई हैं। इनमें तालाबों का पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन, पार्कों और ग्रीन बेल्ट का विकास, उपचारित पानी की पाइपलाइन तथा आधुनिक मशीनरी की खरीद जैसे काम शामिल हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में 23.67 करोड़ रुपये, 2025-26 में 165.73 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2026-27 में सितंबर 2026 तक 57.73 करोड़ रुपये की स्वीकृतियां दी गईं।
गुरुग्राम के 140 तालाबों का क्या है हाल?
नगर निगम क्षेत्र में पहले 74 तालाबों की पहचान की गई थी। विस्तृत सर्वे के बाद इनकी संख्या बढ़ाकर 140 कर दी गई है। इनमें से 113 तालाब नगर निगम के स्वामित्व में हैं। तालाबों के विकास की मौजूदा स्थिति पर नजर डालें तो 32 तालाबों का काम पूरा हो चुका है, जबकि 21 तालाबों पर काम जारी है। वहीं, 60 तालाबों का विकास अभी बाकी है। नगर निगम ने पहले 30 तालाबों के विकास का लक्ष्य दिसंबर 2027 और अन्य 30 तालाबों के विकास का लक्ष्य दिसंबर 2028 तक रखा है।
निगमायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि तालाबों पर अतिक्रमण से जुड़ी समस्याओं को दूर किया जाए और उनकी सीमाओं का पता लगाने के लिए ड्रोन सर्वे कराया जाए।
क्या प्लान है जल संरक्षण को लेकर
बारिश के पानी को जमीन में पहुंचाने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए नगर निगम ने 277 मॉड्यूलर रेनवॉटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं को मंजूरी दी है। इनके लिए 43.44 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इनमें से 145 संरचनाओं का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि 81 पर काम जारी है। इनकी कुल स्वीकृत क्षमता 19,420 घन मीटर यानी करीब 1.94 करोड़ लीटर है। इसके अलावा, पारंपरिक वर्षा जल संचयन संरचनाओं के रखरखाव और दोबारा चालू करने के लिए भी काम किया जा रहा है।

क्या योजना बनाई सिंचाई के लिए
गुरुग्राम के पार्कों में सिंचाई के लिए ताजे पानी की निर्भरता कम करने की योजना भी बनाई गई है। फिलहाल 49.80 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के जरिए 142 पार्कों को उपचारित अपशिष्ट जल उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। अब 55.15 किलोमीटर अतिरिक्त पाइपलाइन बिछाने की योजना है, जिससे 170 और पार्कों को जोड़ा जाएगा। इसके बाद कुल नेटवर्क 104.95 किलोमीटर तक पहुंचने और 312 पार्कों को उपचारित पानी उपलब्ध कराने का अनुमान है।
नगर निगम के अनुसार, प्रस्तावित विस्तार से हर साल करीब 1,138.8 मिलियन लीटर ताजे पानी की खपत को कम किया जा सकता है। हालांकि, यह लक्ष्य पाइपलाइन चालू होने, पानी की उपलब्धता और वास्तविक इस्तेमाल पर निर्भर करेगा। नगर निगम क्षेत्र में कुल 49 माइक्रो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्थापित किए गए हैं। इनमें से 44 चालू हैं, जबकि पांच फिलहाल काम नहीं कर रहे हैं। चालू संयंत्रों की कुल क्षमता 2,025 किलोलीटर प्रतिदिन है। इनसे निकलने वाले उपचारित पानी का इस्तेमाल पार्कों की सिंचाई और छिड़काव जैसे गैर-पेयजल कार्यों में किया जाता है।
पौधरोपण के आंकड़े भी सामने आए
नगर निगम की बागवानी शाखा के अंतर्गत 1,447 पार्क, 31 ग्रीन बेल्ट और 12 सेंट्रल वर्ज हैं। इनके विकास और रखरखाव के लिए भी अलग-अलग वित्तीय वर्षों में करोड़ों रुपये की स्वीकृतियां दी गई हैं। वहीं, वित्त वर्ष 2026-27 में चार लाख झाड़ीनुमा पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे नगर निगम के अनुसार पूरा कर लिया गया है। पेड़ लगाने के मामले में 66,000 पौधों का लक्ष्य रखा गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, एमसीजी ने 39,500 और वन विभाग ने 25,000 पेड़ लगाए हैं। इसके अलावा, कैच फाउंडेशन ने गांव बंधवाड़ी में 1,350 पेड़ और 2,750 झाड़ीनुमा पौधे लगाए हैं।
धूल नियंत्रण के लिए स्पेशल मशीनरी
बागवानी कार्यों और धूल नियंत्रण को मजबूत करने के लिए वित्त वर्ष 2025-26 में 10 ट्रक-माउंटेड एंटी-स्मॉग गन, 40 ट्रैक्टर, 40 ट्रेलर, आठ ट्री-प्रूनिंग प्लेटफॉर्म और 40 श्रेडर खरीदे गए। इसके अलावा, नौ सीएनजी ट्रक-माउंटेड एंटी-स्मॉग गन और दो रोड वॉशर के लिए अलग से कार्यादेश जारी किया गया है। इन संसाधनों का इस्तेमाल धूल नियंत्रण, पेड़ों की छंटाई और बागवानी कचरे के प्रबंधन में किया जाएगा।
अब निगरानी और काम पूरा करने पर रहेगी नजर
निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने कहा कि नगर निगम का उद्देश्य शहर में हरित क्षेत्रों का विस्तार करने के साथ-साथ जल संरक्षण और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करना है। हालांकि, इन योजनाओं की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अधूरे तालाबों का विकास कितनी तेजी से होता है, बंद माइक्रो एसटीपी कब चालू किए जाते हैं और उपचारित पानी की पाइपलाइन का विस्तार कब तक पूरा होता है।
अब देखना होगा कि 247 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृतियों के बाद गुरुग्राम को स्वच्छ, हरित और जल संरक्षण के लिहाज से बेहतर शहर बनाने का लक्ष्य जमीन पर कितनी तेजी से उतरता है।
