गुरुग्राम में करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य के बीच रंगदारी मांगने और जान से मारने की धमकी का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जांच की तो कहानी पूरी तरह बदल गई। शिकायतकर्ता ने जिन लोगों पर काम बंद कराने, पैसे मांगने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए थे, वे पुलिस जांच में सही नहीं पाए गए।

क्या था पूरा मामला?
15 जुलाई को राजेंद्र पार्क थाना पुलिस को एक ठेकेदार ने शिकायत दी थी। उसने बताया कि वह सेक्टर-104 स्थित सेंट्रल पार्क और सेक्टर-106 स्थित एलान प्रोजेक्ट में मिट्टी और पानी का काम करता है।
शिकायत के अनुसार, दोपहर करीब 3 बजे 20 गाड़ियों में सवार 50 से 60 लोग दोनों साइटों पर पहुंचे। आरोप था कि उन्होंने कर्मचारियों और सुरक्षा गार्डों को धमकाया, काम बंद करने की चेतावनी दी और इलाके में काम करने के बदले पैसे मांगे। इतना ही नहीं, ठेकेदार के सुपरवाइजर को भी रास्ते में रोककर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया।
पुलिस जांच में पलट गई कहानी
शिकायत मिलते ही गुरुग्राम पुलिस और अपराध शाखा सेक्टर-10 की टीम ने दोनों साइटों का निरीक्षण किया और मामले की गहन जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस को शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए रंगदारी मांगने, जान से मारने की धमकी देने, काम बंद कराने और दूसरी साइट पर जाकर धमकी देने के आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले। पुलिस ने इन आरोपों को जांच में गलत पाया।
फिर पुलिस ने क्यों की कार्रवाई?
पुलिस के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच तनाव और शांति भंग होने की आशंका को देखते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126/170 के तहत 8 लोगों के खिलाफ निवारक कार्रवाई की गई।
कार्रवाई जिन लोगों पर हुई उनमें नवीन उर्फ भोला, देवेंद्र उर्फ सुखू, परवीन उर्फ मोनू उर्फ चोबे, अजय, मुंडी उर्फ योगेंद्र, अनिल, मोहित और सचेत उर्फ मोटा शामिल हैं।
5 स्कॉर्पियो भी जब्त
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से 5 स्कॉर्पियो वाहन भी बरामद किए हैं। पुलिस का कहना है कि मामले में आगे भी नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
पुलिस की अपील
गुरुग्राम पुलिस ने कहा है कि किसी भी मामले में बिना तथ्यों की पुष्टि किए अफवाहों पर भरोसा न करें। यदि किसी को धमकी या रंगदारी से जुड़ी कोई वास्तविक शिकायत है तो तुरंत पुलिस को सूचना दें, ताकि समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके।
