गुरुग्राम मेफील्ड गार्डन कॉलोनी में रिहायशी मकानों में नियमों के खिलाफ किए गए निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। विभाग के सर्वे में करीब 100 मकानों में स्वीकृत नक्शे और ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट (OC) में तय नियमों का उल्लंघन सामने आया है।
जिला नगर योजनाकार इन्फोर्समेंट (DTPE) अमित मधोलिया के निर्देश पर विभाग की टीम ने कॉलोनी में मकानों का निरीक्षण किया। इस दौरान कई ऐसे मकान मिले, जिनका इस्तेमाल तय रिहायशी उपयोग के बजाय दूसरी व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।

रिहायशी मकानों में चल रहे थे PG, गेस्ट हाउस और शोरूम
सर्वे के दौरान विभाग की टीम को कई मकानों में PG, गेस्ट हाउस और शोरूम जैसी व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होती मिलीं। विभाग के मुताबिक, इन संपत्तियों का इस्तेमाल जिस तरह किया जा रहा था, वह स्वीकृत नक्शे और ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट में तय प्रावधानों के अनुरूप नहीं था।
इसके अलावा कुछ मकानों की स्टिल्ट पार्किंग में भी नियमों के विपरीत कमरे बनाए गए हैं। यानी जिस जगह का इस्तेमाल पार्किंग के लिए होना चाहिए था, वहां अतिरिक्त निर्माण किए जाने की बात सामने आई है।
अब करीब 100 मकान मालिकों को नोटिस
सर्वे रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने करीब 100 मकानों को कार्रवाई के दायरे में लिया है। इन मकानों के मालिकों को अगले दो से तीन दिनों में कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की तैयारी है।
नोटिस मिलने के बाद मकान मालिकों को अपना पक्ष रखने के लिए निर्धारित समय दिया जाएगा। विभाग के अनुसार, यदि सात दिन के भीतर दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता, तो संबंधित संपत्ति के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पहले रिस्टोरेशन, फिर सीलिंग और तोड़फोड़
विभाग की कार्रवाई सीधे तोड़फोड़ से शुरू नहीं होगी। अधिकारियों के मुताबिक, जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर रिस्टोरेशन ऑर्डर जारी किए जाएंगे। इसके बाद भी अगर नियमों का उल्लंघन दूर नहीं किया गया, तो संबंधित मकानों के खिलाफ सीलिंग और तोड़फोड़ की कार्रवाई की जा सकती है।
विभाग ने साफ किया है कि स्वीकृत नक्शे और ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट के विपरीत किए गए निर्माण के साथ-साथ रिहायशी संपत्तियों में बिना अनुमति चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
क्यों अहम है यह कार्रवाई?
मेफील्ड गार्डन जैसी रिहायशी कॉलोनियों में PG, गेस्ट हाउस और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के बढ़ने से पार्किंग, ट्रैफिक, सुरक्षा और कॉलोनी के इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव बढ़ने की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में करीब 100 मकानों पर विभाग की नजर जाना स्थानीय लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि नोटिस जारी होने के बाद कितने मकान मालिक नियमों के मुताबिक निर्माण और इस्तेमाल में बदलाव करते हैं और कितनी संपत्तियों पर विभाग को सीलिंग या तोड़फोड़ की कार्रवाई करनी पड़ती है।
