ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो में बड़ा बदलाव! जमीन को लेकर क्या आया नया फैसला?

गुरुग्राम वालों के लिए ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो से जुड़ा बड़ा अपडेट सामने आया है। मेट्रो का काम जमीन की वजह से अटकता नजर आ रहा था, लेकिन अब सरकार ने इसका रास्ता निकाल लिया है। जमीन मालिकों से आपसी सहमति से जमीन खरीदने की कोशिश की गई, लेकिन इसमें सिर्फ 5 फीसदी जमीन मालिक ही जमीन देने को तैयार हुए। अब हरियाणा सरकार ने मेट्रो के लिए जमीन अधिग्रहण करने का फैसला लिया है।

जमीन खरीदने की नीति हुई फेल
ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो परियोजना के लिए जमीन से जुड़ी अड़चनों को दूर करने के लिए हरियाणा सरकार ने इस साल 8 जनवरी को जमीन खरीद नीति लागू की थी। इसके तहत जिला उपायुक्त की अध्यक्षता में 9 सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी। कमेटी को जमीन मालिकों से बातचीत करके आपसी सहमति से जमीन खरीदनी थी। इसके लिए जमीन मालिकों के साथ तीन बार बैठक भी हुई। लेकिन बातचीत के बाद सामने आया कि सिर्फ 5 प्रतिशत जमीन मालिक ही इस नीति के तहत जमीन देने को तैयार हैं, जबकि 95 प्रतिशत ने जमीन देने से इनकार कर दिया। इसके बाद अब सरकार ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के तहत जरूरी जमीन का अधिग्रहण करने का फैसला लिया है।

मेट्रो के लिए कितनी जमीन चाहिए?
ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो के पहले चरण और सेक्टर-33 में बनने वाले मेट्रो डिपो के लिए कन्हेई, इस्लामपुर और बसई गांव की करीब 10,883 वर्ग मीटर जमीन की जरूरत है।
इसमें:
*कन्हेई: 534 वर्ग मीटर जमीन
*इस्लामपुर: 8,653 वर्ग मीटर जमीन
**बसई: 1,695 वर्ग मीटर जमीन, कन्हेई की जमीन सेक्टर-44 स्थित फोर्टिस अस्पताल से जुड़ी है।

जमीन मालिकों ने क्या मांग रखी?
जमीन देने के बदले कई जमीन मालिकों ने अलग-अलग मांगें रखी हैं। कुछ मालिकों ने जमीन के बदले जमीन देने की मांग की है। वहीं, कुछ जमीन मालिकों ने ढाई लाख रुपये प्रति वर्ग गज तक मुआवजा मांगा। बसई की एक जमीन मालिक ने 5 लाख रुपये प्रति वर्ग गज मुआवजे की मांग रखी है। कुछ जमीन मालिकों ने पुनर्वास और परिवार के सदस्यों को जीएमआरएल में नौकरी देने की मांग भी रखी।

30.5 किलोमीटर लंबी होगी ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो
ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो परियोजना की कुल लंबाई करीब 30.5 किलोमीटर होगी। यह मेट्रो मिलेनियम सिटी सेंटर से शुरू होकर डीएलएफ साइबर सिटी तक जाएगी। परियोजना को दो चरणों में पूरा किया जा रहा है। पहले चरण में मिलेनियम सिटी सेंटर से सेक्टर-9 तक मेट्रो का निर्माण होगा। इसका टेंडर आवंटित हो चुका है और निर्माण का काम चल रहा है। वहीं, दूसरे चरण में सेक्टर-9 से डीएलएफ साइबर सिटी तक मेट्रो बनाई जाएगी। इसके टेंडर की प्रक्रिया चल रही है और अगले महीने टेंडर जारी होने की उम्मीद है।

किन इलाकों से गुजरेगी मेट्रो
ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो के रास्ते में कई प्रमुख इलाके शामिल हैं। इनमें सेक्टर-45, यूनिटेक साइबर पार्क, सेक्टर-47, सुभाष चौक, सेक्टर-48, सेक्टर-72ए, हीरो होंडा चौक, उद्योग विहार फेज-6, सेक्टर-10, सेक्टर-37, बसई, सेक्टर-101, सेक्टर-9, सेक्टर-7, सेक्टर-4, सेक्टर-5 और अशोक विहार समेत कई इलाके शामिल हैं। मेट्रो परियोजना के बीच उमंग भारद्वाज चौक के पास सरस्वती एंक्लेव के पांच मकान भी आ रहे हैं। इन मकानों की जमीन पहले ही हीरो होंडा चौक से उमंग भारद्वाज चौक तक सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई थी। हालांकि, इन मकानों से जुड़ा मामला अभी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में विचाराधीन है।

कई दूसरी अड़चनें भी जल्द होंगी दूर
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने मेट्रो परियोजना से जुड़ी दूसरी अड़चनों को दूर करने के लिए भी अधिकारियों को समयसीमा दी है। 31 दिसंबर तक सेक्टर-10 बिजली घर को शिफ्ट करने और हाईटेंशन तार हटाने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, जीएमडीए को 31 अक्टूबर तक गैस पाइपलाइन हटाने और एनएचएआई को 31 अक्टूबर तक पेयजल लाइन शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए हैं जीएमआरएल को सीवर लाइन शिफ्ट नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं।

सुशील ऐमा मार्ग पर बनेगा बरसाती नाला
मेट्रो परियोजना के साथ-साथ सुशील ऐमा मार्ग पर बरसाती नाले का काम भी जल्द शुरू होने की उम्मीद है। जीएमडीए ने इसके लिए करीब 33 करोड़ रुपये का एस्टीमेट तैयार किया है। टेंडर के लिए मुख्यमंत्री की मंजूरी का इंतजार है। दूसरे चरण की मेट्रो परियोजना के तहत इस रास्ते पर भी मेट्रो का निर्माण होना है।

अब आगे क्या?
जमीन मालिकों के साथ आपसी सहमति से जमीन खरीदने की कोशिश सफल नहीं होने के बाद अब सरकार भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के तहत जमीन अधिग्रहण करेगी। इससे मेट्रो परियोजना के लिए जरूरी जमीन जुटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अब देखना होगा कि जमीन अधिग्रहण और दूसरी अड़चनों को दूर करने के बाद ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो का काम कितनी तेजी से आगे बढ़ता है।

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