चावल खरीदने से पहले ये खबर जरूर पढ़ लीजिए… क्योंकि दुनिया के एक कोने में चल रहे युद्ध का असर अब आपकी रसोई तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। भारत में चावल की कीमतों में तेजी आई है और इसके पीछे सिर्फ एक वजह नहीं, बल्कि कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं।
अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते दुनियाभर में खाने-पीने की चीजों की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। कई देश अपनी जरूरत का अनाज पहले से खरीदकर रखने की कोशिश कर रहे हैं। इसका असर भारत के चावल बाजार पर भी पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत के बासमती चावल की कीमतें पिछले साल के मुकाबले करीब 15 से 20 फीसदी तक बढ़ी हैं। वहीं नॉन-बासमती चावल की कीमतों में करीब 20 से 25 फीसदी तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

आखिर भारत में चावल महंगा क्यों हो रहा है?
इसकी एक बड़ी वजह विदेशों से बढ़ी मांग है। युद्ध और पश्चिम एशिया में बनी अनिश्चित स्थिति के बीच कई देश अपने लिए खाद्य भंडार सुरक्षित करना चाहते हैं। ऐसे में भारतीय चावल की मांग बढ़ी है। दूसरी तरफ भारत में बारिश से जुड़ी चिंता भी बढ़ी है। सामान्य से कम बारिश के कारण नई फसल के उत्पादन को लेकर सवाल उठे हैं। इससे बाजार में सप्लाई को लेकर दबाव बढ़ा है और कीमतों को सहारा मिला है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातकों में शामिल है और विदेशों में भारतीय चावल की बड़ी मांग है। खासकर पश्चिम एशिया भारतीय बासमती के लिए बड़ा बाजार है। APEDA के आंकड़ों के मुताबिक, 2021 से 2025 के बीच भारत के बासमती चावल के निर्यात में पश्चिम एशिया की हिस्सेदारी करीब 77% रही।
क्या आगे भी महंगा रह सकता है चावल?
फिलहाल बाजार में कीमतों पर दबाव बना हुआ है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, कारोबारियों को अक्टूबर-नवंबर में नई फसल आने तक कीमतों में बड़ी राहत की उम्मीद कम है।
हालांकि चावल की कीमत सिर्फ अमेरिका-ईरान युद्ध पर निर्भर नहीं है। भारत में फसल का उत्पादन, बारिश, घरेलू मांग, निर्यात और अंतरराष्ट्रीय बाजार इन सभी का असर कीमतों पर पड़ता है। यानी अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष का असर सिर्फ तेल और शिपिंग तक सीमित नहीं है। इसका असर अब उन चीजों पर भी दिखाई दे रहा है जो सीधे आपकी रसोई से जुड़ी हैं।
