Gurugram में सालों से घरों से कूड़ा न उठने की शिकायतों के बीच नगर निगम ने अब बड़ा दांव खेला है। ₹606 करोड़ के टेंडर जारी कर डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन सिस्टम को पूरी तरह बदलने का दावा किया जा रहा है।

लेकिन सवाल वही है — क्या इस बार वाकई बदलाव होगा या फिर कहानी वही रहेगी?
पूरा प्लान क्या है?
नगर निगम ने शहर को 2 बड़े क्लस्टर में बांटकर काम निजी एजेंसियों को देने की तैयारी की है:
- ₹295 करोड़ – पहले दो जोन
- ₹311 करोड़ – बाकी दो जोन
- अवधि – 5 साल (1825 दिन)
यानी अब कूड़ा उठान “अस्थायी जुगाड़” नहीं, बल्कि लंबी अवधि की जिम्मेदारी होगी।
अभी क्यों फेल है सिस्टम?
जमीनी सच्चाई:
- 6 एजेंसियां काम कर रही हैं
- फिर भी पूरा कलेक्शन नहीं
- कई सेक्टरों में कूड़ा सड़कों पर
नतीजा — लोग खुद ही बाहर कचरा फेंक रहे हैं
इस बार क्या बदलेगा?
निगम का दावा:
- गीला और सूखा कचरा अलग होगा
- प्रोसेसिंग सिस्टम सुधरेगा
- प्रदूषण कम होगा
लेकिन Gurugram के लोग पहले भी ऐसे दावे सुन चुके हैं।
पुराने ठेके क्यों रहे विवादों में?
- पारदर्शिता पर सवाल
- काम अधूरा
- संसाधनों की कमी
यही वजह है कि इस बार लोगों की नजर सिर्फ “घोषणा” पर नहीं, बल्कि “रिजल्ट” पर है।
अधिकारी क्या कह रहे?
एक्सईएन सुंदर श्योराण का कहना है:
“नई व्यवस्था से कलेक्शन और प्रोसेसिंग दोनों बेहतर होंगे।”
