गुरुग्राम में अब निर्माण या तोड़फोड़ से निकलने वाला मलबा कहीं भी डालना आसान नहीं होगा।नगर निगम गुरुग्राम (MCG) ने Construction & Demolition यानी C&D Waste को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन नियमों में मलबे के संग्रहण से लेकर उसके परिवहन, प्रोसेसिंग, रीसाइक्लिंग और दोबारा इस्तेमाल तक की व्यवस्था तय की गई है।
MCG कमिश्नर प्रदीप दहिया की ओर से जारी आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। नए नियमों के तहत बड़े डिमोलिशन और निर्माण प्रोजेक्ट्स के लिए C&D Waste का हिसाब देना और उसे अधिकृत व्यवस्था के जरिए निस्तारित करना जरूरी होगा।

डिमोलिशन पर पहले से बताना होगा मलबा
अगर किसी प्रोजेक्ट में 200 वर्गमीटर या उससे ज्यादा प्लॉट एरिया पर तोड़फोड़ होनी है, तो बिल्डिंग प्लान की मंजूरी के समय ही संभावित C&D Waste की मात्रा बतानी होगी। इसके बाद निर्माण या दोबारा निर्माण शुरू करने से पहले डिमोलिशन से निकले मलबे को MCG की अधिकृत प्रोसेसिंग फैसिलिटी या तय कलेक्शन प्वाइंट पर जमा कराना होगा।
इसकी रसीद भी संभालकर रखनी होगी, क्योंकि संबंधित प्रमाण के सत्यापन के बाद ही Occupancy और Completion Certificate जारी किया जाएगा।
20 हजार वर्गमीटर वाले प्रोजेक्ट्स पर भी नई व्यवस्था
20,000 वर्गमीटर या उससे ज्यादा बिल्ट-अप एरिया वाले प्रोजेक्ट्स के लिए भी खास नियम बनाए गए हैं। ऐसे प्रोजेक्ट के डेवलपर या आवेदक को Integrated Waste Management Plan तैयार करके MCG पोर्टल पर मंजूरी के लिए जमा करना होगा। प्रोजेक्ट से निकलने वाला C&D Waste संबंधित प्रोड्यूसर को अपने वाहनों के जरिए MCG की रीसाइक्लिंग फैसिलिटी तक पहुंचाना होगा। इसके लिए C&D Waste का डिपॉजिट MCG के C&D पोर्टल के जरिए ट्रैक किया जाएगा।
MCG ने C&D Waste को सिर्फ हटाने की बजाय उससे तैयार होने वाले Recycled Products के इस्तेमाल पर भी जोर दिया है। भवन निर्माण में रीसाइकल्ड एग्रीगेट, Manufactured Sand और दूसरे रीसाइकल्ड उत्पादों के इस्तेमाल का प्रतिशत हर साल बढ़ाया जाएगा।
*2026-27: 5%
*2027-28: 10%
*2028-29: 15%
*2029-30: 20%
*2030-31 से: 25%
वहीं सड़क निर्माण से जुड़े प्रोजेक्ट्स में 2030-31 से आगे कम से कम 15% रीसाइकल्ड सामग्री के इस्तेमाल का प्रावधान है।
सड़क-सीवर की खुदाई का मलबा कितने समय में हटाना होगा?
नए नियमों में अलग-अलग कामों के बाद C&D Waste हटाने की समय-सीमा भी तय की गई है।
*ROW रिपेयर या रेस्टोरेशन: काम खत्म होने के 48 घंटे के भीतर
*सड़क रिपेयर/रीसर्फेसिंग/रोड रेस्टोरेशन: अधिकतम 72 घंटे
*सीवर लाइन का काम: 72 घंटे
*जलापूर्ति लाइन का काम: 72 घंटे
इसके अलावा सार्वजनिक जगह पर जमा C&D Waste को 24 घंटे के भीतर हटाना होगा।
सरकारी प्रोजेक्ट भी नियमों के दायरे में
ये नियम सिर्फ निजी बिल्डरों तक सीमित नहीं हैं। MCG क्षेत्र में काम करने वाले सरकारी विभागों के प्रोजेक्ट भी इसके दायरे में होंगे। सरकारी प्रोजेक्ट से निकलने वाले C&D Waste को MCG की प्रोसेसिंग फैसिलिटी या मोबाइल प्लांट के जरिए रिसाइकिल करना होगा। टेंडर में भी संभावित C&D Waste की मात्रा का उल्लेख करना और उसके सुरक्षित निस्तारण का प्रमाण लेना जरूरी होगा।
बनेगा C&D Monitoring Cell
MCG ने C&D Waste की निगरानी के लिए एक अलग C&D Monitoring Cell बनाने का भी प्रावधान किया है। इस Cell की जिम्मेदारी अतिरिक्त आयुक्त स्तर के अधिकारी के पास होगी। इसके साथ एक जूनियर इंजीनियर और दो ऑपरेटर काम करेंगे। पोर्टल के जरिए ठेकेदारों और सरकारी विभागों के अनुपालन पर नजर रखी जाएगी और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
पोर्टल पर दर्ज होगी पूरी जानकारी
सभी संबंधित सरकारी विभागों को MCG के C&D Waste पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रोजेक्ट ठेकेदारों का रजिस्ट्रेशन भी जरूरी होगा। C&D Waste जमा करने और रीसाइकल्ड सामग्री खरीदने की प्रक्रिया को भी डिजिटल पोर्टल से जोड़ा गया है। MCG ने साफ किया है कि दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने पर संबंधित प्रावधानों के तहत Environmental Compensation की कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है। गंभीर मामलों में CAQM Act, 2021 की धारा 14 के तहत भी कार्रवाई का प्रावधान है।
मलबे से बनेंगे फुटपाथ और पार्क के सामान
MCG रीसाइकल्ड C&D Products के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए पोर्टल पर एक Recycled Product Marketplace की व्यवस्था भी कर रहा है। यहां से गैर-संरचनात्मक कामों के लिए कर्ब स्टोन, बोलार्ड, फुटपाथ टाइल्स, पार्क बेंच, प्लांटर, ड्रेन कवर और ट्री गार्ड जैसे उत्पाद लिए जा सकेंगे।
क्यों अहम है ये बदलाव?
गुरुग्राम में लगातार चल रहे निर्माण, सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के बीच C&D Waste का सही निस्तारण एक बड़ा मुद्दा है। नए नियमों में पहली बार मलबे की मात्रा बताने, उसे अधिकृत जगह पर जमा कराने, रीसाइकल्ड सामग्री के इस्तेमाल और डिजिटल ट्रैकिंग को एक साथ जोड़ा गया है। यानी अब फोकस सिर्फ मलबा हटाने पर नहीं, बल्कि मलबा कहां गया और उसका इस्तेमाल कैसे हुआ इस पर भी रहेगा।
